Sun, 20 Sep 2026
Breaking News
सुपौल : रामनगर कन्या आवासीय विद्यालय का अधिकारियों ने किया निरीक्षण | सुपौल : रामलाल के कॉमेडी शो में उमड़ी भीड़, ‘हरे-हरे, ब्यूटी पार्लर घरे-घरे’ पर जमकर हंसे दर्शक | सुपौल : पिपरा में राजस्व विभाग के निर्देशों का अनुपालन अनिवार्य: सीओ | सुपौल : पिपरा में गणेश महोत्सव मेले का एसडीएम ने लिया जायजा, अधिकारियों को दिए सुरक्षा के निर्देश। | सुपौल : नशाबंदी को लेकर चार गांवों के ग्रामीणों ने लिया संकल्प, कहा—‘नशा करेंगे नहीं, नशा करने देंगे नहीं’ | सुपौल : 17 वर्षों से नन्ही जिंदगियों की सेहत का मजबूत सहारा, सिमराही बाजार के ‘चिल्ड्रेन हेल्थ केयर’ पर बढ़ा अभिभावकों का भरोसा | SEPTEMBER 2026 : SUPAUL DASTAK SEPTEMBER 2026 | सुपौल : बाबा गणिनाथ गोविंद की 14वीं जयंती साहेब टोला वार्ड नंबर 1 में निकाली गई भव्य शोभायात्रा | सुपौल : सीएचसी पिपरा की बदहाली पर सिविल सर्जन बिफरे, व्यवस्था में सुधार का दिया सख्त निर्देश | सुपौल : कीचड़ और जलजमाव से बदहाल पिपराही की मुख्य सड़क, ग्रामीणों का आवागमन हुआ मुश्किल | सुपौल : रामनगर कन्या आवासीय विद्यालय का अधिकारियों ने किया निरीक्षण | सुपौल : रामलाल के कॉमेडी शो में उमड़ी भीड़, ‘हरे-हरे, ब्यूटी पार्लर घरे-घरे’ पर जमकर हंसे दर्शक | सुपौल : पिपरा में राजस्व विभाग के निर्देशों का अनुपालन अनिवार्य: सीओ | सुपौल : पिपरा में गणेश महोत्सव मेले का एसडीएम ने लिया जायजा, अधिकारियों को दिए सुरक्षा के निर्देश। | सुपौल : नशाबंदी को लेकर चार गांवों के ग्रामीणों ने लिया संकल्प, कहा—‘नशा करेंगे नहीं, नशा करने देंगे नहीं’ | सुपौल : 17 वर्षों से नन्ही जिंदगियों की सेहत का मजबूत सहारा, सिमराही बाजार के ‘चिल्ड्रेन हेल्थ केयर’ पर बढ़ा अभिभावकों का भरोसा | SEPTEMBER 2026 : SUPAUL DASTAK SEPTEMBER 2026 | सुपौल : बाबा गणिनाथ गोविंद की 14वीं जयंती साहेब टोला वार्ड नंबर 1 में निकाली गई भव्य शोभायात्रा | सुपौल : सीएचसी पिपरा की बदहाली पर सिविल सर्जन बिफरे, व्यवस्था में सुधार का दिया सख्त निर्देश | सुपौल : कीचड़ और जलजमाव से बदहाल पिपराही की मुख्य सड़क, ग्रामीणों का आवागमन हुआ मुश्किल | सुपौल : रामनगर कन्या आवासीय विद्यालय का अधिकारियों ने किया निरीक्षण | सुपौल : रामलाल के कॉमेडी शो में उमड़ी भीड़, ‘हरे-हरे, ब्यूटी पार्लर घरे-घरे’ पर जमकर हंसे दर्शक | सुपौल : पिपरा में राजस्व विभाग के निर्देशों का अनुपालन अनिवार्य: सीओ | सुपौल : पिपरा में गणेश महोत्सव मेले का एसडीएम ने लिया जायजा, अधिकारियों को दिए सुरक्षा के निर्देश। | सुपौल : नशाबंदी को लेकर चार गांवों के ग्रामीणों ने लिया संकल्प, कहा—‘नशा करेंगे नहीं, नशा करने देंगे नहीं’ | सुपौल : 17 वर्षों से नन्ही जिंदगियों की सेहत का मजबूत सहारा, सिमराही बाजार के ‘चिल्ड्रेन हेल्थ केयर’ पर बढ़ा अभिभावकों का भरोसा | SEPTEMBER 2026 : SUPAUL DASTAK SEPTEMBER 2026 | सुपौल : बाबा गणिनाथ गोविंद की 14वीं जयंती साहेब टोला वार्ड नंबर 1 में निकाली गई भव्य शोभायात्रा | सुपौल : सीएचसी पिपरा की बदहाली पर सिविल सर्जन बिफरे, व्यवस्था में सुधार का दिया सख्त निर्देश | सुपौल : कीचड़ और जलजमाव से बदहाल पिपराही की मुख्य सड़क, ग्रामीणों का आवागमन हुआ मुश्किल |

सुपौल : पत्रकार का दर्द : सच लिखने वाले पत्रकारों की पीड़ा और संघर्ष | Rajesh Kumar Ranjan

Rajesh Kumar Ranjan / Tue, May 26, 2026 / Post views : 243

Share:

पत्रकार का दर्द

राजेश कुमार रंजन

Founder, Editor & Chief Reporter

Supaul Dastak News

पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, लेकिन आज सच लिखना और दिखाना पहले से कहीं ज्यादा कठिन हो गया है। हर शब्द पर निगरानी, हर सवाल पर दबाव और हर सच के पीछे खतरे की आहट महसूस होती है। इसके बावजूद कई पत्रकार अपनी जान जोखिम में डालकर समाज के सामने सच्चाई लाने का काम कर रहे हैं।

इसी संघर्ष और पीड़ा को दर्शाती यह कविता पत्रकारों के दर्द, साहस और जिम्मेदारी को शब्द देती है।

सच लिखना अब आसान कहाँ,

हर शब्द पर पहरा रहता है,

जो आईना समाज को दिखाए,

वही सबसे ज्यादा सहता है।

कलम उठी तो सवाल उठे,

सत्ता को यह मंजूर न था,

जो सच जनता तक पहुँचा दे,

उसका बच पाना दूर न था।

भीड़ के बीच अकेला पत्रकार,

अपनी जान हथेली पर रखता है,

कभी धमकी, कभी अपमान,

फिर भी सच लिखता रहता है।

उसकी आवाज दबाने को,

झूठ का शोर मचाया जाता है,

लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को,

सरेआम डराया जाता है।

लेकिन कलम कभी झुकती नहीं,

सच की लौ बुझती नहीं,

जितना दबाओगे आवाज को,

उतनी बुलंद होकर निकलती है वहीं।

पत्रकार सिर्फ एक नाम नहीं,

जनता की उम्मीद होता है,

उसकी लड़ाई खुद के लिए नहीं,

हर बेबस की जीत होता है।

जो सच के रास्ते चलते हैं,

उनका दर्द कोई क्या जाने,

घाव छुपाकर मुस्कुराते हैं,

फिर भी सच के गीत सुनाने।

सलाम उन कलमकारों को,

जो हर डर से लड़ जाते हैं,

सच की खातिर इस दुनिया में,

खुद दर्द सहकर भी लिख जाते हैं।

निष्कर्ष

यह कविता सिर्फ शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि उन पत्रकारों की भावनाओं और संघर्ष का आईना है जो हर परिस्थिति में सच को सामने लाने का साहस रखते हैं। समाज को जागरूक रखने वाले ऐसे सभी कलमकार सम्मान के पात्र हैं।

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें