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सुपौल : 76 वर्ष की उम्र में भी सेवा का जज़्बा बरकरार, हजारों मरीजों के विश्वास का नाम हैं डॉ. योगेंद्र प्रसाद जायसवाल

Rajesh Kumar Ranjan / Mon, Jul 20, 2026 / Post views : 103

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76 वर्ष की उम्र में भी सेवा का जज़्बा बरकरार, हजारों मरीजों के विश्वास का नाम हैं डॉ. योगेंद्र प्रसाद जायसवाल

(राजेश कुमार रंजन - संपादक, सुपौल दस्तक अखबार)

आज के समय में जहां अधिकांश लोग वृद्धावस्था में विश्राम का जीवन चुनते हैं, वहीं सुपौल जिले के पिपरा प्रखंड अंतर्गत थुमहा बाजार के प्रसिद्ध होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. योगेंद्र प्रसाद जायसवाल 76 वर्ष की आयु में भी पूरे उत्साह, ऊर्जा और समर्पण के साथ मरीजों की सेवा में निरंतर लगे हुए हैं। चिकित्सा के प्रति उनका समर्पण, सादगी और सेवा भाव उन्हें क्षेत्र के सबसे सम्मानित चिकित्सकों में शामिल करता है।

डॉ. योगेंद्र प्रसाद जायसवाल पिछले 51 वर्षों से होम्योपैथिक चिकित्सा के माध्यम से लोगों की सेवा कर रहे हैं। उनका मानना है कि होम्योपैथिक चिकित्सा केवल एक उपचार पद्धति नहीं, बल्कि रोगी के संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का प्रभावी माध्यम है। वे कहते हैं कि सही तरीके से दी गई होम्योपैथिक दवाएं रोग को जड़ से समाप्त करने में सहायक होती हैं और सामान्यतः इनके दुष्प्रभाव नहीं होते। यही कारण है कि पिछले पांच दशकों में उन्होंने हजारों मरीजों का सफल उपचार कर लोगों का विश्वास अर्जित किया है।

उन्होंने बताया कि उनके यहां केवल बिहार ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देश नेपाल से भी मरीज इलाज के लिए आते हैं। इंसान हो या मवेशी, सभी का इलाज वे पूरी निष्ठा और उचित शुल्क पर करते हैं। उनका उद्देश्य केवल उपचार करना नहीं, बल्कि हर जरूरतमंद व्यक्ति तक बेहतर स्वास्थ्य सेवा पहुंचाना है।

डॉ. जायसवाल की उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें समय-समय पर कई सामाजिक एवं चिकित्सकीय संस्थाओं द्वारा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है। उनका मानना है कि "रोगी का विश्वास ही किसी चिकित्सक की सबसे बड़ी पूंजी है।" यही विश्वास उन्हें आज भी पूरी निष्ठा के साथ सेवा करने की प्रेरणा देता है।

76 वर्ष की आयु में भी उनका उत्साह, कार्यक्षमता और सेवा के प्रति समर्पण युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। चिकित्सा क्षेत्र में उनका पांच दशक का अनुभव केवल सुपौल ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार के लिए गर्व की बात है। मरीजों के बीच उनकी पहचान एक ऐसे चिकित्सक के रूप में है, जिन्होंने सेवा, ईमानदारी और मानवीय संवेदनाओं को हमेशा सर्वोपरि रखा है।

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